इस्लाम इन्सान की हैसियत से इन्सान के कुछ हक़ और अधिकार मुक़र्रर करता है। दूसरे शब्दों में इसका मतलब यह है कि हर इन्सान चाहे, वह हमारे अपने देश और वतन का हो या किसी दूसरे देश और वतन का, हमारी क़ौम का हो या किसी दूसरी क़ौम का, मुसलमान हो या ग़ैर-मुस्लिम, किसी जंगल का रहने वाला हो या किसी रेगिस्तान में पाया जाता हो, बहरहाल सिर्फ़ इन्सान होने की हैसियत से उसके कुछ हक़ और अधिकार हैं जिनको एक मुसलमान लाज़िमी तौर पर अदा करेगा और उसका फ़र्ज़ है कि वह उन्हें अदा करे।
2014
इस्लाम में खाललस इन्सानी अधिकार
- भाषा
हिन्दी
- प्रकाशक
- islamhouse.com
- वर्ष
- 2014
- पृष्ठ
- 41
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- शीर्षक
- इस्लाम में खाललस इन्सानी अधिकार
- प्रकाशक
- islamhouse.com
- वर्ष
- 2014
- पृष्ठ
- 41
- भाषा
- हिन्दी
- प्रारूप
- जोड़ी गई
- May 9, 2017
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