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क़ुर्आन और पैग़म्बर

क़ुर्आन और पैग़म्बर

क़ुर्आन और पैग़म्बर
  • क़ुर्आन और पैग़म्बर
  • संसार में जितने भी सत्य के संदेशवाहक आये सब ने अपना जीवन उन झूठे ईश्वरों के ईश्वरत्व का खण्डन करने में लगाया, जिन्हें इंसान ने अल्लाह को छोड़ कर अपना ईश्वर बना लिया था। लेकिन सदा यही होता रहा कि उनके बाद उनके मानने वालों ने अज्ञानतापूर्ण श्रद्धा के कारण स्वयं उन्हीं को ईश्वर या ईश्वरत्व में ईश्वर का भागीदार बना लिया। इस पुस्तिका में इसका कारण स्पष्ट करते हुए क़ुर्आन के हवाले से ईश्दूतों की वास्तविकता, उनके कर्तव्यों और उद्देशों का वर्णन किया गया है, तथा विशिष्ट रूप से अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के शिष्टाचाऱ और विशेषताओं का उल्लेख किया गया है।القرآن والرسول : هذا الكتيب يتحدث عن الأسباب التي أدت إلى غلو الناس في الأنبياء والمصلحين حتى جعلوهم أربابا من دون الله، ويبين حقيقة الأنبياء والرسل والهدف من بعثتهم، وما الذي جعل نبينا محمدا - صلى الله عليه وسلم - مميزا بين الرسل، وما هي مهامه، وصفاته التي ذكرها الله في القرآن الكريم.
  • Publisher: www.islamhouse.com
  • Year of Publication: 2013
  • Number of Pages: 78
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सं

नवजात शिशु का आगमन मनुष्य के लिए एक अपार खुशी का अवसर होता है। इस अवसर को लोग अपनी-अपनी परंपराओं और रीतियों के अनुरूप विभिन्न प्रकार से मनाते और हर्ष व उल्लास का प्रदर्शन करते हैं। इस्लाम धर्म में नवजात शिशु के विशेष प्रावधान हैं, जिनमें से एक यह है कि जिस व्यक्ति को अल्लाह ने इस नेमत से सम्मानित किया है, वह अल्लाह के प्रति आभार प्रकट करते हुए उसकी निकटता के तौर पर अक़ीक़ा करे। अक़ीक़ा के क्या प्रावधान हैं ? उसके कौन-कौनसे मुद्दे हैं ? तथा इसी विषय से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण बातें इस पुस्तिका में प्रस्तुत की गई हैं।

 كتاب مترجم إلى اللغة الهندية عبارة عن عشرون فتوى من علماء اللجنة الدائمة في العقيقة ، تم جمعها وترتيبها لتعميم النفع بها. وهي تتناول معظم الأحكام والمسائل التي يكثر السؤال عنها في باب العقيقة.

क़ुर्आन और पैग़म्बर

संसार में जितने भी सत्य के संदेशवाहक आये सब ने अपना जीवन उन झूठे ईश्वरों के ईश्वरत्व का खण्डन करने में लगाया, जिन्हें इंसान ने अल्लाह को छोड़ कर अपना ईश्वर बना लिया था। लेकिन सदा यही होता रहा कि उनके बाद उनके मानने वालों ने अज्ञानतापूर्ण श्रद्धा के कारण स्वयं उन्हीं को ईश्वर या ईश्वरत्व में ईश्वर का भागीदार बना लिया। इस पुस्तिका में इसका कारण स्पष्ट करते हुए क़ुर्आन के हवाले से ईश्दूतों की वास्तविकता, उनके कर्तव्यों और उद्देशों का वर्णन किया गया है, तथा विशिष्ट रूप से अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के शिष्टाचाऱ और विशेषताओं का उल्लेख किया गया है।القرآن والرسول : هذا الكتيب يتحدث عن الأسباب التي أدت إلى غلو الناس في الأنبياء والمصلحين حتى جعلوهم أربابا من دون الله، ويبين حقيقة الأنبياء والرسل والهدف من بعثتهم، وما الذي جعل نبينا محمدا - صلى الله عليه وسلم - مميزا بين الرسل، وما هي مهامه، وصفاته التي ذكرها الله في القرآن الكريم.

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संसार में जितने भी सत्य के संदेशवाहक आये सब ने अपना जीवन उन झूठे ईश्वरों के ईश्वरत्व का खण्डन करने में लगाया, जिन्हें इंसान ने अल्लाह को छोड़ कर अपना ईश्वर बना लिया था। लेकिन सदा यही होता रहा कि उनके बाद उनके मानने वालों ने अज्ञानतापूर्ण श्रद्धा के कारण स्वयं उन्हीं को ईश्वर या ईश्वरत्व में ईश्वर का भागीदार बना लिया। इस पुस्तिका में इसका कारण स्पष्ट करते हुए क़ुर्आन के हवाले से ईश्दूतों की वास्तविकता, उनके कर्तव्यों और उद्देशों का वर्णन किया गया है, तथा विशिष्ट रूप से अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के शिष्टाचाऱ और विशेषताओं का उल्लेख किया गया है।القرآن والرسول : هذا الكتيب يتحدث عن الأسباب التي أدت إلى غلو الناس في الأنبياء والمصلحين حتى جعلوهم أربابا من دون الله، ويبين حقيقة الأنبياء والرسل والهدف من بعثتهم، وما الذي جعل نبينا محمدا - صلى الله عليه وسلم - مميزا بين الرسل، وما هي مهامه، وصفاته التي ذكرها الله في القرآن الكريم.

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